केरल Exit Poll : LDF को सबसे ज्यादा सीटें, एनडीए को 1-2 सीटें मिलने के आसार
तिरुवनंतपुरम केरल विधानसभा चुनाव के सामने आने लगे हैं। ओपिनियन पोल की तरह ही एग्जिट पोल में भी लेफ्ट नीत एलडीएफ की सरकार में वापसी का अनुमान लगाया जा रहा है। तकरीबन सभी एग्जिट पोल में सीपीएम नीत गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है। वहीं यूडीएफ के 50-60 सीटों में सिमटने का अनुमान है। बीजेपी को एक या दो सीटें मिल सकती हैं। रिपब्लिक-सीएनएक्स का सर्वे रिपब्लिक-सीएनएक्स के सर्वे के मुताबिक, केरल में एलडीएफ की सरकार बनने वाली है। सर्वे ने सीपीएम नीत एलडीएफ को 72-80 सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को 58 से 64 सीटें मिल सकती हैं। एनडीए को 1 से 5 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया सर्वे इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया के सर्वे के मुताबिक, तमिलनाडु में एक बार फिर एलडीएफ की सरकार बन सकती है। यहां एलडीएफ को 47 फीसदी सीटें मिल सकती हैं। वहीं, यूडीएफ को 38 फीसदी सीटें मिलने का अनुमान जताया जा रहा है। बीजेपी को 12 फीसदी वोट मिल सकता है। सीटों की बात करें तो लेफ्ट पार्टी को 104-120 सीटें मिल सकती हैं। यूडीएफ 20 से 36 सीटों पर सिमट सकती है। एनडीए को भी 0-2 सीटों पर जीत मिलने की संभावना है। न्यूज 24-टुडेज चाणक्य का सर्वे न्यूज 24-टुडेज चाणक्य के अनुसार भी प्रदेश में एलडीएफ को बंपर जीत मिल सकती है। इस सर्वे में एलडीएफ को 102 सीटों पर जीतते दिखाया जा रहा है। वहीं यूडीएफ को 35 सीटें मिलने का अनुमान है। बीजेपी को भी 3 सीटें मिल सकती हैं। एबीपी-सी वोटर का सर्वे एबीपी-सी वोटर सर्वे के मुताबिक केरल में लेफ्ट को 71-77 सीटों पर जीत मिल सकती है। वहीं, कांग्रेस नीत यूडीएफ को 62 से 68 सीटें मिल सकती हैं। बीजेपी को 0-2 सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है।
ओपिनियन पोल में भी डीएमके सरकार केरल में जनता का मूड जानने के लिए चुनाव से पहले ओपिनयन पोल कराए गए थे, जिसके नतीजों ने प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की आशंका को खारिज कर दिया गया था। ओपिनियन पोल के मुताबिक, प्रदेश में लेफ्ट को एक बार फिर जनता मौका दे सकती है। 6 अप्रैल को केरल की 140 सीटों के लिए हुए मतदान के बाद गुरुवार को कई एजेंसियों के एग्जिट पोल भी सामने आ रहे हैं। हालांकि, इस सूदूर दक्षिणी प्रदेश में किसकी सरकार बनेगी, इसका अंतिम फैसला 2 मई को आएगा। कांग्रेस ने लगाया था जोर बीते 6 अप्रैल को तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और बंगाल के साथ केरल में भी चुनाव कराए गए थे। इस दौरान 73.58 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। इस बार के चुनाव में जहां लेफ्ट की पिनराई विजयन के सामने अपना अस्तित्व बचाने की चुनौती है, वहीं कांग्रेस ने भी सत्ता में वापसी के लिए पूरा जोर लगाया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लंबे समय तक केरल में जमे हुए थे। उन्होंने यहां कई रैलियां की थीं और कई स्कूलों में छात्र-छात्राओं से संवाद कर चर्चा में बने रहे थे। हालांकि, बीते 40 सालों में केरल में कोई भी गठबंधन सरकार दोबारा सत्ता में वापसी नहीं कर सकी है। ऐसे में देखना होगा कि 4 दशकों का यह इतिहास बदलेगा या फिर केरल के लोगों को नई सरकार मिलेगी। साल 2016 के विधानसभा चुनाव में सीपीएम के नेतृत्व वाले एलडीएफ ने कांग्रेस नीत यूडीएफ को अपदस्थ करके सत्ता हासिल की थी। प्रदेश की 140 विधानसबा सीटों में से एलडीएफ को 83 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं यूडीएफ को 47 सीटें मिली थीं। बीजेपी और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी चुनाव में जीत हासिल की थी। केरल में इस बार बीजेपी भी उम्मीद लगाए बैठी है। चुनाव से पहले मेट्रोमैन ई श्रीधरन को इसी उद्देश्य से पार्टी में शामिल किया गया था।
एजेंसी | LDF | UDF | NDA |
न्यूज 24-टुडेज चाणक्य | 102 (+-9) | 35 (+-9) | 3 (+-3) |
एबीपी-सी वोटर | 71-77 | 62-68 | 0-2 |
इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया | 104-120 | 20-36 | 0-2 |
रिपब्लिक-सीएनएक्स | 72-80 | 58-64 | 1-5 |
पोल ऑफ पोल्स | 91 | 47 | 2 |
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